सूर्य के चारों तरफ बना रिंग - जानें, इस खगोलीय घटना को क्या कहते हैं

दुर्लभ खगोलीय घटना, झारखण्ड में ज्यादातर स्थानों पर सूर्य के चारों ओर लाल और नीला वलय सा दिखा

सूर्य के चारों तरफ बना रिंग - जानें, इस खगोलीय घटना को क्या कहते हैं

ऑनलाइन डेस्क : 

सोमवार को देशभर में लगभग सभी स्थानों पर सुबह करीब 11 बजे सूर्य के चारों तरफ घेरा जैसा नजारा दिखा। सूर्य के चारों ओर लाल और नीला वलय दिखा। इसे सूर्य का वलय (Sun Halo) बताया जा रहा है। खगोल विज्ञान में इसे ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ (22 degree circular halo) कहते हैं।

जानकारों ने बताया कि आसमान में जब बादल डेरा बनाते हैं और ये अगर अंतरिक्ष की ऊपरी परत पर चले जाते हैं तो सूर्य की रोशनी इससे टकराकर लौटती है। इस रिफ्लेक्शन से सूर्य के चारों तरफ वलय का आभास होता है।

अगर इस प्रकार की स्थिति सुबह या शाम में बने तो हमें इंद्रधनुष नजर आता है। सुबह के समय में आसमान की ऊपरी परत में बादल जमने पर पूर्व की दिशा में और शाम के समय में पश्चिम की दिशा में इंद्रधनुष बनता दिखता है। सूर्य के चारों तरफ वलय की स्थिति सुबह 10 बजे के बाद और शाम में तीन बजे तक तेज धूप रहने की स्थिति में दिखती है।

भारत जैसे गर्म देशों में दुर्लभ है यह घटना 

ठंडे जिलों में यह आम घटनाक्रम है। हालांकि भारत जैसे गर्म देशों में यह घटना दुर्लभ है। ये घटना फिर कब होगी, इसका कोई पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता। इसके बाद तूफान आने की आशंका होती है।

खगोल विज्ञान में इसे ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ कहते हैं

ऐसा तब होता है जब सूर्य या चंद्रमा की किरणें बादलों में मौजूद षट्कोणीय बर्फ क्रिस्टलों से अपवर्तित हो जाती हैं। इस घटना को सूर्य या कुछ मौकों पर चंद्रमा का ‘22 डिग्री सर्कुलर हलो’ कहा जाता है। बताया जाता है इस तरह के बादल तब बनते हैं, जब पृथ्वी की सतह से 5 से 10 किमी उंचाई पर जलवाष्प बर्फ के क्रिस्टलों में जम जाती है।

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