बसंत पंचमी के दिन क्यों पहने जाते हैं पीले रंग के कपड़े ?

पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक भी है. यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है.

ऑनलाइन डेस्क :

देश भर में बसंत पंचमी का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. इसलिए बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा की आयोजन किया जाता है. इस दिन को श्री पंचमी के नाम से भी जानते हैं.

पूरे साल को छह ऋतुओं में बांटा गया है, इनमें वसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा ऋतु, शरद ऋतु, हेमंत ऋतु और शिशिर ऋतु शामिल है. इनमें वसंत को सभी ऋतुों का राजा भी कहा जाता है.

पीला रंग हिंदु धर्म में शुभ रंग माना जाता है. इसके अलावा पीला रंग माता सरस्वती का प्रिय रंग है. साथ ही पीला रंग शुद्ध और सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक भी है. यह सादगी और निर्मलता को भी दर्शाता है. इसलिए मां सरस्वती की पूजा के वक्त लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं.

वहीं इसके अलावा मां सरस्वती की पूजन के दौरान पीले रंग के चावल, पीले लड्डू और केसर की खीर का भी उपयोग किया जाता है. वहीं वसंत ऋतु में सरसों की फसल का फूल आ जाता है. इसकी वजह से पूरी धरती पीली नजर आती है.

गलती से भी ना करें ये काम...

शास्त्रों के मुताबिक वसंत पंचमी को कभी शुभ कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन पेड़ पौधों को गलती से भी नहीं काटना चाहिए.

शास्त्रों में वसंत पंचमी को विद्यारंभ एवं अन्य प्रकार के मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मुहूर्त माना गया है. इसी के साथ कहा जाता है कि वसंत पंचमी के दिन किसी को भी अपशब्द नहीं बोलना चाहिए. 

इस दिन मां सरस्वती की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए. इसलिए इस दिन जातकों को सात्विक जीवन व्यतीत करना चाहिए और मांस-मदिरा से दूर रहना चाहिए.

इस दिन शारीरिक संबंध बनाने से भी बचना चाहिए. बल्कि ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए ना ही इस प्रकार के भाव मन में लाना चाहिए.

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