सावन में क्यों लगाई जाती है मेहंदी

सावन में झूला झूलने का भी विशेष महत्व है

ऑनलाइन डेस्क :

सावन माह का इंतजार हर किसी को होता है, ये भोलेनाथ का प्रिय माह होने के साथ-साथ इस दौरान गर्मी भी थोड़ी कम हो जाती है. सावन का महीना प्रकृति के सौन्दर्य का महीना माना जाता है. भोलेनाथ को प्रसन्न करके वर पाने के लिए ये माह बहुत ही खास होता है. 

सावन के महीने में श्रृंगार का भी बहुत महत्व होता है. श्रृंगार विवाहित महिलाओं के सौभाग्य का प्रतीक है,शादीशुदा औरतें 16 श्रृंगार करती हैं और कुंआरी कन्याएं मेहंदी व हरी, लाल चूड़ियां पहनती हैं. जिसमें सबसे खास बात है हाथों को मेहंदी से सजाना.


इसी तरह सावन महीने में झूलों का भी विशेष महत्व होता है.कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने राधा को भी झूला झूलाया था. इसी के बाद से झूला झूलने की परंपरा शुरू हुई. ऐसे में सावन महीने में झूला झूलना शुभ माना जाता है.

भारत में मेहंदी लगाने का प्रचलन सदियों से चला आ रहा है.मेहंदी का पूजन सामग्री के रूप में भी उपयोग होता है. लेकिन धार्मिक महत्व, खासतौर से सावन में मेहंदी के महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ मेहंदी लगाने का वैज्ञानिक कारण भी है. 

कहा जाता है कि मेहंदी जितनी गहरी होती है, उतना ही पति से अधिक प्रेम मिलता है. इसके अलावा मेहंदी स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक मानी जाती है. मेहंदी लगाने से गर्मी दूर होती है और शरीर को ठंडक मिलती है. मेहंदी से तनाव भी दूर होता है.

शादी ब्याह हो या कोई तीज-त्योहार मेहंदी के बिना सब अधूरे होते हैं. ऐसी मान्यता है कि सुहागिन महिलाओं के मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है, उन्हें अपने पति का उतना ही प्यार मिलता है. साथ ही मेहंदी लगाने से हाथों की खूबसूरती भी बढ़ जाती है. 

देश की अन्य खबरें