जया एकादशी व्रत से पिशाच योनि का भय होता है खत्म, जानें पूजा विधि और महत्व

जया एकादशी में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी विशेष पूजा करें।

ऑनलाइन डेस्क :

माघ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। हिंदू धर्म में सभी एकादशी तिथियों का खास महत्व है। जया एकादशी की खास महत्ता के बारे में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था।

ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु की जया एकादशी के दिन पूजा करने से पिशाच योनि का भय नहीं रहता है।

इस लेख से जानते हैं कि जया एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व क्या है।

जया एकादशी व्रत का तिथि और शुभ मुहूर्त: एकादशी तिथि आरंभ: 22 फरवरी 2021 (सोमवार) शाम 05 बजकर 16 मिनट से

एकादशी तिथि समाप्त: 23 फरवरी 2021 (मंगलवार) शाम 06 बजकर 05 मिनट तक। जया एकादशी पारणा शुभ मुहूर्त: 24 फरवरी को सुबह 06 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 09 मिनट तक। पारणा अवधि- 2 घंटे 17 मिनट।



जया एकादशी पूजा विधि

जया एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें। इस दिन स्नानादि के बाद साफ़ हल्के पीले रंग के वस्त्र पहनें। पूजा में पांच सफेद जनेऊ केसर में रंग लें और पांच साफ़ फल चढ़ाएं। पीले आसन पर बैठें और तुलसी की माला से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का तीन माला जाप करें। जप के पश्चात् पांचों जनेऊ और पीले फल भगवान विष्णु को चढ़ा दें। इसके बाद अपनी इच्छा भगवान विष्णु के सामने कहें। आप स्वयं और परिवार के सभी सदस्य प्रसाद के रूप में केले ग्रहण करें। जया एकादशी में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी विशेष पूजा करें।

 

जया एकादशी व्रत का महत्व

हिंदू धर्म में जया एकादशी विशेष फलदायी मानी गई है। पौराणिक शास्त्रों में भी इसे पुण्यदायी एकादशी बताया गया है। इस एकादशी का व्रत करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है। शास्त्रों की मानें तो इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को भूत-प्रेत, पिशाच मुक्ति मिल जाती है। यह जीवन में आने वाले संकट से भी व्यक्ति की रक्षा करता है।

 

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