खरवार भोगता समुदाय के लोगों ने अनुसूचित जनजाति में शामिल किये जाने को लेकर किया प्रदर्शन 

भोगता समुदाय 74 वर्षों से अपने अस्तित्व की मूल पहचान से है वंचित : सुरेश

खरवार भोगता समुदाय के लोगों ने अनुसूचित जनजाति में शामिल किये जाने को लेकर किया प्रदर्शन 

रुपेश कुमार/लातेहार:

खरवार भोगता समाज विकास संघ लातेहार जिला समिति ने बुधवार को बाजारटांड़ से लेकर समाहरणालय तक एक विशाल जुलूस निकाला। बाद में नगर पंचायत के समीप उन्होंने धरना दिया। धरना की अध्यक्षता खरवार समाज के जिला अध्यक्ष सुरेश भोगता ने की।

धरना को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों झारखंड, बिहार, बंगाल, असम ,उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में खरवार जनजाति की मुख्य उपजाति भोगता समुदाय के लोग बहुसंख्यक में हैं । भोगता समुदाय घने जंगलों, पहाड़ों में बसने के कारण सामाजिक, शैक्षणिक एवं राजनीतिक विकास से कोसों दूर है। जिसके कारण इस समुदाय के लोगों को मूलभूत सुविधाओं एवं अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।

खरवार भोगता समुदाय के लोगों ने अनुसूचित जनजाति में शामिल किये जाने को लेकर किया प्रदर्शन 

उन्होंने आगे कहा कि देश की आजादी के बाद साजिश के तहत 10 अगस्त 1950 में भोगता समुदाय को अलग जाति बना दिया गया। झारखंड प्रदेश अनुसूचित जाति श्रेणी में क्रम संख्या तीन पर भोगता समुदाय को सूचीबद्ध किया गया है। जिसके कारण भोगता समुदाय 74 वर्षों से अपने अस्तित्व की मूल पहचान से वंचित है।

उन्होंने बताया कि मूल पहचान खोने के कारण भोगता समाज की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। अपनी विवशता के कारण समाज के लोग धीरे-धीरे ईसाई धर्म की ओर मुखातिब हो रहे हैं। यह हमारे समाज के लिए गंभीर समस्या है। सामाजिक संगठन खरवार भोगता समाज विकास संघ के लंबे संघर्षों के परिणाम स्वरूप जनजाति शोध संस्थान रांची के द्वारा खरवार जनजाति के उप जातियों का अध्ययन कर खरवार की उप जातियों पर निदेशक का मंतव्य कल्याण विभाग झारखंड सरकार को प्रेषित किया गया है। 

खरवार भोगता समुदाय के लोगों ने अनुसूचित जनजाति में शामिल किये जाने को लेकर किया प्रदर्शन 

धरना समाप्ति के बाद संघ के लोगों ने उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपकर संविधान अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश संशोधन विधेयक 2020 को आगामी लोकसभा शीतकालीन सत्र 2021 में पारित करने के लिए मांग की है।

इस मौके पर केंद्रीय उपाध्यक्ष रामनाथ भोगता, रामेश्वर भोगता, महेंद्र गंझू, प्रदीप गंझू, नारायण भोगता, बहादुर गंझू, राम रामबचन गंझू, रामदेव सिंह भोगता, जगदीश सिंह भोगता, ज्ञानती देवी, सुमन देवी, पार्वती देवी समेत कई लोग उपस्थित थे।

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