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महुआडांड़ के लोध जलप्रपात को देखने देश-विदेश से आते हैं लोग

लातेहार जिले के महुआडांड़ में स्थित लोध जलप्रपात झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। इसकी ऊंचाई 143 मीटर ( 469 फ़ीट) है

महुआडांड़ के लोध जलप्रपात को देखने देश-विदेश से आते हैं लोग

शहजाद आलम/महुआडांड़ :

झारखंड राज्य के लातेहार जिला में राज्य का सबसे ऊँचा जलप्रपात है। ज़िले के महुआडांड़ प्रखंड में स्थित यह वॉटरफॉल को लोध जलप्रपात (Lodh Waterfall) के नाम से प्रसिद्ध है। यह जलप्रपात बहुत ही खूबसूरत है। पहाड़ों की हसीन वादियों में पहाड़ों की ऊंचाइयों से कल कल करती हुई धवल पानी की धारा नीचे की ओर गिरती है। अक्टूबर माह से जनवरी माह तक यहां लोगों का तांता लगा रहता है। लोग देश-विदेश से इस जलप्रपात को देखने आते हैं और इसकी सुंदरता को निहारते रह जाते हैं। इसकी तारीफ करते नहीं थकते हैं।

बता दें कि यह जलप्रपात झारखंड का सबसे ऊंचा जलप्रपात है। इसकी ऊंचाई 143 मीटर (469 फीट) है। इसका उद्गम स्थल छत्तीसगढ़ का जमूरा पाठ है। यह नदी महुआडांड़ भेड़िया आश्रयणी (Mahuadand Wolf Sanctury) और पलामू ब्याघ्र आरक्ष (Palamu Tiger Reserve) की जीवन रेखा है। यह नदी आगे जाकर बागेचम्पा बारेसाढ़ के पास उत्तरी कोयल नदी से मिल जाती है। लोध जलप्रपात महुआडांड़ भेड़िया आश्रयणी के अंतर्गत स्थित है।

महुआडांड़ के लोध जलप्रपात को देखने देश-विदेश से आते हैं लोग

लोध फॉल के दीदार का लगने लगा शुल्क, वाहन के अनुसार देने होंगे 20, 30, 50 और 100 रुपए 

इसकी जानकारी देते हुए इको विकास समिति लोध के मारतुस तिर्की ने बताया कि 15 नवंबर से शुल्क लेना प्रारंभ कर दिया गया है। दो पहिया वाहन से 20 तीन पहिया से 30 चार पहिया से 50 तथा चार पहिया वाहनों से जो बड़े वाहन होंगे उनसे ₹100 लिया जाएगा।

बताते चलें कि इको विकास समिति लोध के द्वारा लोध फॉल पहुंचने से लगभग 1 किलोमीटर पहले टोल नाका लगाया गया है ताकि गाड़ियों को यहां पर रोक कर शुल्क लिया जा सके।

राज्य के पर्यटन विभाग ने भी लोगों की तैनाती की है 

झारखंड टूरिज्म विभाग ने लोध फॉल की देखरेख एवं टूरिस्ट की सहायता के लिए 12 लोगों की तैनाती की है। इनमें तैराक, माली, गार्ड, कुक और सफाई कर्मी शामिल हैं। ये सभी महुआडांड़ के लोध और आसपास के गांवों के रहने वाले हैं। 

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