महुआडांड़ : आदिम जनजाति परिवार ग़रीबी में रहने को बेबस, न मिलता है राशन, न मिला सरकारी आवास

महेंद्र कोरवा का राशन कार्ड भी नहीं है

महुआडांड़ : आदिम जनजाति परिवार ग़रीबी में रहने को बेबस, न मिलता है राशन, न मिला सरकारी आवास

शहजाद आलम/महुआडांड़:

सरकार लाख दावा करे कि आदिम जनजातिय आदिवासी परिवार को हर संभव मदद कि जा रही है, इनके जीवन स्तर में सुधार आ रहा है, यह बात कहना बेमानी है।

महुआडांड़ प्रखंड के पंचायत अक्सी के चेतमा गांव के आदिम जनजाति का महेंद्र कोरवा  के परिवार में पत्नी और छह बच्चे हैं। महेंद्र कोरवा का राशन कार्ड नहीं है। सरकार के द्वारा मिलने वाला अनाज भी इस विशेष आदिवासी परिवार को नहीं मिलता है।


गरीबी के कारण महेंद्र कोरवा की एक नाबालिग बेटी जो लगभग 15 वर्ष की है उसे घरो में काम करने के लिए एक स्थानीय दलाल के द्वारा एक साल पुर्व दिल्ली ले जाया गया पर बेटी के कार्य का मिलने वाला पैसा दलाल द्वारा गबन कर दिया।

महेंद्र कोरवा ने कहा घर में खाने को चावल नहीं है। गांव में रोजगार नहीं मिलता है। गरीबी के कारण बच्चों को शिक्षा नही दे सकता हूं। आवास का लाभ भी नहीं मिला है। रहने को घर नहीं झोपड़ी बना रहता हूं।

गरीबी के कारण बेटी को विनोद नाम के एक व्यक्ति के द्वारा दिल्ली घरो में कार्य करने को ले जाया गया है। एक महिने का 7 हजार देने की बात थी आज एक साल हो गया केवल 10 हजार रूपए मात्र मिला है। 

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