मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सड़क पर शिशु को जन्म देने के मामले की जांच 

अंधविश्वास के चक्कर में शिशु की जान गई थी : डॉ एमपी सिंह

मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सड़क पर शिशु को जन्म देने के मामले की जांच 

सुनील नूतन/सतबरवा :

पलामू ज़िले के सतबरवा प्रखंड के रबदा गांव की कुकुरबंधवा टोला निवासी एक महिला के द्वारा ठेमा गांव के बीच सड़क पर मृत शिशु को जन्म देने की जांच एक बार फिर की गई।बुधवार को पलामू और लातेहार जिला के चिकित्सकों की टीम ने मौके पर जाकर मामले की जांच की। 

विदित हो कि 18 सितंबर 2019 को एक महिला ने सड़क पर शिशु को जन्म दिया था। जांच टीम ने सड़क पर जहां शिशु का जन्म हुआ उस जगह का भी मुआयना किया।

इस मामले में मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लिए जाने के बाद एक बार फिर से जांच प्रक्रिया शुरू की गई है। ओंकार विश्वकर्मा नामक व्यक्ति ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लचर बताते हुए आयोग से इस मामले की जांच की मांग की है। 

जांच टीम में पलामू के चिकित्सक एमपी सिंह के साथ मनिका और बरवाडीह सीएचसी प्रभारी डॉ. सीमा रानी, डॉ. सुबोध कुमार के साथ बीटीटी अजय सोनी भी थे।

डॉ एमपी सिंह ने बताया कि झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण शिशु की मौत का कारण बना। स्वास्थ्य संबंधी प्रॉब्लम होने पर लोग चिकित्सकों के सलाह अनुसार इलाज कराएं। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में लोग नहीं पड़े।

मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सड़क पर शिशु को जन्म देने के मामले की जांच 

सास छठनी देवी ने सदस्यों को बताया कि महिला अपने पति के साथ साइकिल से झाड़-फूंक कराने के बाद घर लौट रही थी। रास्ते में प्रसव पीड़ा से छटपटाने लगी। 8-10 महिलाओं ने पीड़िता का गैर संस्थागत प्रसव कराया।सूचना के 20-25 मिनट बाद स्वास्थ्य विभाग का एंबुलेंस पहुंचा था।

वही गौतनी सविता देवी के अनुसार जिस समय एंबुलेंस पहुंचा उस समय महिला बच्चा को जन्म दे रही थी। मृत शिशु होने के बाद हमलोगों ने एंबुलेंस को वापस भेज दिया ताकि मृत बच्चा का दाह संस्कार हो सके।

मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सड़क पर शिशु को जन्म देने के मामले की जांच 

बताया कि पति गुड्डू सिंह के साथ महिला अपने नैहर 15 दिन पहले चैनपुर के बहेरा गांव गई हैं। फिर से गर्भवती है और टोना -टोटका के भय से घर से बाहर है।

मालूम हो कि प्रखंड स्थापना के 27 साल बाद सतबरवा के रबदा पंचायत मनिका सीएचसी अधीन है। 

देश की अन्य खबरें