सैंपल देकर पड़ोसी का नंबर दे दे रहे, पड़ोसी को आ रहा फोन, आप पाजिटिव हैं...

ऐसे लोग जिन्होंने जांच करवायी ही नहीं, फिर भी पाजिटिव बताकर आ रहे फोन

सैंपल देकर पड़ोसी का नंबर दे दे रहे, पड़ोसी को आ रहा फोन, आप पाजिटिव हैं...

Photo Credit - Sanjib Dutta

लातेहार :

कोरोना काल में कुछ ऐसे भी लोग हैं जो अपना सैंपल देकर जिला प्रशासन को अपने पड़ोस का नंबर दे दे रहे हैं ताकि पाजिटिव आने पर प्रशासन उन्हें क्वारंटाइन न करे। नतीजा है कि प्रशासन की टीम ऐसे लोगों तक पहुंच नहीं पा रही। वहीं वैसे लोगों को फोन जा रहा जिन्होंने अपना सैंपल दिया ही नहीं। उन्हें कहा जा रहा है कि आप पाजिटिव हैं, इससे बढ़ रही परेशानी। लातेहार में ऐसे दो मामले सामने आए हैं। जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। 

दरअसल इस गड़बड़झाले का खुलासा शुक्रवार को लातेहार रेलवे स्टेशन के व्यवसाई सुशील उदयपुरी ने किया। उन्होंने कहा कि जब मैने कोरोना वायरस संक्रमण की जांच ही नहीं कराई, तो मेरी कोविड 19 रिपोर्ट पॉजिटिव कैसे आई?

उन्होंने बताया कि रिपोर्ट पॉजिटिव आने का पता तब चला जब स्वास्थ्य विभाग के द्वारा फोन कर पॉजिटिव होने की बात कही गई। कुछ समय तक परिवार में हड़कंप मच गया। व्यवसायी ने मजबूर होकर आनन-फानन में कोविड 19 केंद्र पहुंचकर कोरोना का टेस्ट कराया। कोविड जांच रिपोर्ट निगेटिव आने पर व्यवसायी ने राहत की सांस ली।

व्यवसाई ने दावा किया कि उन्होंने कोरोना की जांच कराई ही नहीं फिर भी उनका नाम व मोबाइल नंबर कैसे दर्ज हो गया। उन्होंने आगे बताया कि बात यहीं ख़त्म नहीं हुई। 6 मई को जारी एक अन्य जांच रिपोर्ट में भी दूसरे मरीज के नाम के आगे उनका मोबाइल नंबर दर्ज है।

उन्होंने कहा कि जिले में कोविड की जांच में सिर्फ खाना पूर्ति की जा रही है। जांच रिपोर्ट उल्टा- पलटा देकर लोगों को भयभीत करने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा की स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मेरे अलावा कई लोगों की रिपोर्ट गलत दी है।

उन्होंने कहा कि लातेहार के उपायुक्त को सारे मामले की जानकारी दी गई है। उन्होंने इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

इस दूसरे मामले में लातेहार निवासी बालेश्वर पांडेय ने कहा कि जब मेरी उम्र 66 वर्ष है? और मैंने कोविड टेस्ट कराया ही नहीं है तो मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव कैसे आई? यह मेरे समझ से परे है। 

इस सम्बन्ध में पूछे जाने पर लातेहार के सिविल सर्जन डा. संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि कोरोना जांच का सैंपल देकर पड़ोसी का नंबर दे देना गलत है। इससे विभागीय कर्मियों के लिए परेशानी बढ़ जाती है। साथ ही अकारण कर्मियों की बदनामी होती है।

वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं यह कर्मचारी की लापरवाही तो नहीं कि उसने गलत नंबर दर्ज किया।

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