'मोक्ष भूमि' गया जी में पितरों की मुक्ति के लिए पिंडदान प्रारम्भ 

अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को ‘पितृपक्ष‘ या ‘महालय पक्ष‘ कहा जाता है, जिसमें लोग अपने पुरखों का पिंडदान करते हैं

पटना :

मोक्ष भूमि' गया जी की धरती पर शनिवार से पितरों की मुक्ति की कामना लेकर आने वाले देश विदेश से तीर्थयात्रियों द्वारा पिंडदान का कार्य शुरू हो गया। पंडों (पुजारियों) द्वारा विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान, तर्पण का कार्य प्रारंभ हो गया।

पितृ मोक्ष धाम से प्रसिद्ध गया में प्रत्येक वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृपक्ष मेले का आयोजन होता है। कोरोना के कारण पिछले दो वर्ष इसका आयोजन नहीं हुआ।

इस वर्ष पितृपक्ष मेले में छह से सात लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।


गया के जिलाधिकारी त्यागराजन एस एम ने आज गया में श्रद्धालुओं को मिल रही सुविधा का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष मेला को लेकर पूरे मेला क्षेत्र में सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर करीब साढ़े चार हजार पुलिसकर्मियों को लगाया गया है । उन्होंने कहा कि आज पहला दिन है, लोगों से मिल रहे फीडबैक के बाद और सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

इधर, आने वाले श्रद्धालु भी मिलने वाली सुविधा से खुश हैं।

श्री विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के सचिव गजाधर लाल पाठक के अनुसार पुनपुन नदी में माथा मुंडन कराने के बाद श्रद्धालु त्रिपाक्षिक पिंडदान के लिए गया आते हैं। धार्मिक ग्रंथों व पुराणों के अनुसार माथा मुंडन कराने वाले श्रद्धालुओं को तीर्थ के समान फल की प्राप्ति होती है।

गया शहर में पितृपक्ष मेला से संबंधित 54 पिंडवेदी हैं। इसमें 45 पिंडवेदी एवं नौ तर्पणस्थल गया में स्थित हैं।

हिन्दु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों की आत्मा की शांति एवं मुक्ति के लिए पिंडदान अहम कर्मकांड है। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष को ‘पितृपक्ष‘ या ‘महालय पक्ष‘ कहा जाता है, जिसमें लोग अपने पुरखों का पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि पिंडदान करने से मृत आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। ऐसे तो पिंडदान के लिए कई धार्मिक स्थान हैं परंतु सबसे उपयुक्त स्थल बिहार के गया को माना जाता है।

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