भोजपुरी, मगही पर सीएम हेमंत के बयान का विरोध शुरू, भाजपा कांग्रेस ने मिलाया सुर

हेमंत सोरेन के पिछले कार्यकाल में भी भोजपुरी और मगही भाषाओं को लेकर विवाद हुआ था 

भोजपुरी, मगही पर सीएम हेमंत के बयान का विरोध शुरू, भाजपा कांग्रेस ने मिलाया सुर

रांची :

भोजपुरी, मगही भाषा को लेकर सीएम हेमंत सोरेन के बयान पर राजनीति गरम हो गई है। भाजपा और गठबंधन में शामिल कांग्रेस सहित दूसरे दलों व विधायकों ने इस पर ऐतराज जताया है। ऐसे बयान को असंवैधानिक, नियम विरुद्ध, अशोभनीय बताया है। 

विदित हो कि हेमंत सोरेन ने एक इंटरव्यू में कहा था कि झारखंड आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों की छाती पर पैर रख कर, महिलाओं की इज्जत लूटते वक्त भोजपुरी भाषा में ही गाली दी जाती थी। भोजपुरी और हिन्दी भाषा की बदौलत अलग राज्य की लड़ाई नहीं लड़ी गई। इन भाषाओं को प्रश्रय देने से राज्य का बिहारीकरण हो जायेगा।

पूर्व मंत्री और विधायक भानु प्रताप शाही ने ट्विटर पर अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने कहा है कि उर्दू, ओड़िया और बंगाली झारखंडी भाषा तो नहीं। भोजपुरी, मगही, अंगिका को बिहारी भाषा कहा जाना शर्मनाक है। जिस प्रदेश में इतनी सारी भाषाएं बोली जाती हैं, वहां एक भाषा को लेकर इतनी नफरत का मतलब हिन्दी से भी नफरत को दर्शाता है। 

वहीँ पूर्व मंत्री और इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष केएन त्रिपाठी ने सीएम के कथन का विरोध करते हुए कहा कि देश में कमोबेश सभी भाषाओं में गालियां दी जाती हैं, तो क्या इससे राष्ट्रीय या क्षेत्रीय भाषा का दर्जा छीन लिया जाएगा? सीएम ने माना कि भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली बिहार की भाषा है, तो बंगला और उड़िया भी ओड़िशा और बंगाल की भाषा है। फिर इस आधार पर भाषा का मानक कैसे तय किया जा सकता है?

भोजपुरी, मगही पर सीएम हेमंत के बयान का विरोध शुरू, भाजपा कांग्रेस ने मिलाया सुर

उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण भाषा के आधार पर नहीं हुआ है। झारखंड का निर्माण दक्षिण बिहार इलाके के अतिपिछड़ेपन को दूर करने के मकसद से किया गया है। झारखंड में अगर विभिन्न जातियों और विभिन्न धर्मों के लोग निवास करते हैं तो उनकी भाषाएं भी एक नहीं हो सकतीं। हमारे राज्य में संतालपरगना में संताली अलावा देवघर-गोड्डा में अंगिका और मैथिली बोली जाती है। यदि कोल्हान के चाईबासा में मुंडारी और हो बोली जाती है, तो जमशेदपुर में मगही और भोजपुरी बोली जाती है। वहीं बोकारो, धनबाद, गिरिडीह के ग्रामीण इलाकों में खोरठा तो शहरी इलाकों में भोजपुरी और मगही बोली जाती है, तो शहरी इलाकों में भोजपुरी और मगही भी बोली जाती है। पलामू, लातेहार, गढ़वा और चतरा में पूर्णतः मगही बोली जाती है, ये सारे जिले झारखंड के ही भाग हैं। इनके मुख्यमंत्री भी हेमंत सोरेन ही हैं। 

उन्होंने सीएम से मांग की है कि राज्यहित में अपने वक्तव्यों पर पुनर्विचार करें।

2013-14 में भी हुआ था भाषा विवाद

उल्लेखनीय है कि 2013-14 में भी हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री रहते भाषा विवाद उठा था। उस समय झारखंड कांग्रेस के प्रभारी रहे बीके हरिप्रसाद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर पहल कर भाषा विवाद पर विराम लगाते हुए मगही और भोजपुरी भाषाओं को परीक्षाओं में शामिल करने का फैसला लिया था। 

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