महुआडांड़ की लाइफलाइन रामपुर नदी का अस्तित्व खतरे में

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हर सप्ताह टीम बना कर मछली रहे लोग नदी को पहुंचा रहे नुकसान

महुआडांड़ की लाइफलाइन रामपुर नदी का अस्तित्व खतरे में

शहजाद आलम/ महुआडांड़ :

महुआडांड़ के एक मात्र रामपुर नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। रामपुर नदी स्थित छठ घाट में हर सप्ताह कुछ लोगों के द्वारा टीम बना कर मछली मारने का काम किया जाता है। मछली मारने के क्रम में पूरी नदी को बांध कर मछली मारने का कार्य बृहद पैमाने पर किया जाता है। जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

वहीं महुआडांड़ की रामपुर नदी ऐसा स्थान है जहां सुबह से शाम तक हजारों की संख्या में सभी समुदाय के लोग नहाने एवं कपड़ा धोने का कार्य करते हैं। परंतु मछली मारने के दौरान लोग आकर मछली मारने वालों को खरी खोटी सुना कर वापस चलें जाते हैं। परंतु मछली मारने वालों कान जूं तक नहीं रेंगती और लोगों की बातों की  अनदेखी कर मछली मारने में मशगूल रहते हैं और पूरी नदी को तहस नहस कर चले जाते हैं।

 

प्रकृति के साथ खिलवाड़

बता दें कि महुआडांड़ का एकमात्र रामपुर नदी महुआडांड़ के सभी समुदायों के लिए लाईफलाईन नदी है। इस नदी से हजारों लोग पानी से जुड़े  हर कार्यों का निपटारा तो करते ही हैं। साथ में छठ पूजा, शवों की अंत्येष्टि समेत कई कार्यों का निपटारा इस नदी के द्वारा किया जाता है। अगर इसी तरह आये दिन मछली मारने का कार्य लागातार किया जायेगा तो निश्चित रूप से नदी का अस्तित्व मिट जायेगा। 

स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले की अपेक्षा नदी का रंग रुप बुरी तरह से खराब हो गया है। अगर इस ओर प्रशासन एवं ग्रामीणों के द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो इसका नतीजा बहुत ही खराब हो सकता है।

लोगों ने बताया कि पूर्वजों ने कहा है कि यदि प्रकृति के साथ इस तरह खिलवाड़ जारी रहा तो प्रकृति स्वयं को नष्ट कर लेती है। 

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