सौरव गांगुली को दिल का दौरा, दिल की 3 धमनियां ब्लॉक

बीसीसीआई (BCCI) अध्यक्ष सौरव गांगुली को दिल का दौरा पड़ने के बाद कोलकाता के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

ऑनलाइन डेस्क :

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को ‘हल्के’ दिल के दौरे के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया. 48 वर्षीय गांगुली की हालत स्थिर है और वह निजी वुडलैंड्स अस्पताल में अपना इलाज करा रहे हैं. ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार गांगुली को एक स्टेंट लगाया गया है और उनकी एंजियोप्लास्टी खत्म हो गई है.

सर्जरी के बाद अब उनकी हालत बेहतर है. गांगुली को अस्पताल की क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती कराया गया है. शुक्रवार शाम वर्कआउट सत्र के बाद उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत हुई और आज दोपहर दोबारा ऐसी समस्या के बाद परिवार के सदस्य उन्हें अस्पताल ले गए.

सौरव गांगुली का ताजा हेल्थ बुलेटिन

वुडलैंड्स अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि गांगुली के तीन धमनियों में ब्लॉकेज पाया गया है. इनमें से एक धमनी 90 फीसदी तक ब्लॉक है. सर्जरी के बाद उसकी हालत स्थिर बनी हुई है. डॉक्टर्स अगले कुछ दिनों में दो और स्टेंट प्रत्यारोपित करने पर विचार कर सकते हैं. गांगुली अभी अगले दो दिनों तक अस्पताल में ही रहेंगे.



वुडलैंड्स अस्पताल का बयान

वुडलैंड्स अस्पताल ने सौरव गांगुली का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए बताया, ''बीसीसीआई अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली को अपने घर के जिम में ट्रेडमिल पर दौड़ते समय सीने में तकलीफ का सामना करना पड़ा. उनके परिवार में IHD ØE इस्केमिक हृदय रोग का इतिहास रहा है. जब उन्हें दोपहर एक बजे अस्पताल लाया तो उनका पल्स रेट 70 और 80/130 था. दूसरे क्लिनिकल पैरामीटर्स सामान्य थे. इको से पता चला है कि उनके हृदय में इंफेक्शन हुआ है हालांकि वह स्थिर हैं. उन्हें एंटी प्लेटलेट्स और स्टेटिन की डबल डोज दी गई है और अभी प्राथमिक एंजियोप्लास्टी चल रही है.''

पिछले साल बने थे बीसीसीई के अध्यक्ष

गांगुली को अक्टूबर 2019 में मुंबई में बीसीसीआई की आम सभा की बैठक के दौरान अध्यक्ष चुना गया जिसके साथ सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) के 33 महीने के विवादास्पद कार्यकाल का अंत हुआ. गांगुली बीसीसीआई के 39वें अध्यक्ष हैं. उन्होंने सीके खन्ना की जगह ली जो 2017 से बोर्ड के अंतरिम प्रमुख थे.

गांगुली का कार्यकाल शुरुआत में नौ महीने का था लेकिन वह और बोर्ड के सचिव जय शाह अपने पद पर बरकरार हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अब तक बीसीसीआई की याचिका पर फैसला नहीं किया है जिसमें नए संविधान में संशोधन की मांग की गई है. नया संविधान लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार पदाधिकारियों की आयु और कार्यकाल को सीमित करता है. यह पूर्व क्रिकेटर इससे पहले बंगाल क्रिकेट संघ में कई पदों पर रहा. वह 2014 में संघ के सचिव बने थे.

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