रात में सोते समय पसीना आना बहुत ही खतरनाक

डॉक्टर से वरना उठाना पड़ सकता है नुकसान

ऑनलाइन डेस्क :

बहुत सारे लोगों को रात में सोते समय बहुत पसीना निकलता है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो आपको तुरंत ही सावधान होने की जरूरत है. डॉक्टर्स कहते हैं कि रात में अधिक पसीना आना खतरे की घंटी हो सकती है.

अगर आप इस समस्या से जूझ रहे हैं तो इसे नजरअंदाज करने की बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लें.

टीबी: 

पसीना आना आमतौर पर चिंता का विषय नहीं माना जाता. हालांकि तब परेशान होने की जरूरत है, जब ज़रूरत से ज़्यादा पसीना आए और वो भी रात में. डॉक्टर्स कहते हैं कि ट्यूबरक्लोसिस यानी क्षय रोग से ग्रसित कुछ लोगों को रात में पसीना आने की समस्या रहती है. ऐसे में डॉक्टर से तुरंत मिलना चाहिए.

हार्मोन डिसऑर्डर: 

हार्मोनल गड़बड़ी की वजह से भी स्वेटिंग की यह बीमारी हो सकती है. इनमें फियोक्रामोसाइटोम, कार्सिनॉइड सिंड्रोम आदि शामिल हैं.

आइडियोपैथिक हाइपरहाइड्रोसिस: 

रात में पसीना आने की खास वजह कई मामलों में नजर नहीं आती है. इसे आइडियोपैथिक हाइपरहाइड्रोसिस के नाम से जाना जाता है. इसमें बिना किसी वजह से शरीर से काफी पसीना आने लगता है. रात में अत्यधिक पसीना आना या नाइट स्वेट की ये वजहें हो सकती हैं.

इंफेक्शन: 
कुछ तरह के बैक्टीरिया के इंफेक्शन की वजह से भी नाइट स्वेट होता है. इसमें हार्ट वॉल्व में सूजन, हड्डियों से जुड़े इंफेक्शन के साथ ही एचआईवी इंफेक्शन भी हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर से सलाह लें और उनके बताए टेस्ट जरूर करवाएं, ताकि सही कारण पता चल सके.
कैंसर: 
नाइट स्वेट कैंसर का शुरुआती लक्षण भी होता है. लिंफोमा में यह लक्षण सबसे ज्यादा दिखाई देता है. वजन घटना और बुखार आना भी कैंसर का लक्षण हो सकता है.
हाइपोग्लाइसिमिया: 
ब्लड ग्लूकोज कम होने से भी स्वेटिंग होती है. जो लोग इंसुलिन या ओरल एंटीबायोटिक दवाइयां लेते हैं, उन्हें रात में पसीना आने के साथ ही हाइपोग्लाइसिमिया की समस्या भी होती है.
दवाइयों से भी: 
एंटीडिप्रेसेंट दवाइयों की वजह से यह समस्या होना आम बात है. बुखार कम करने वाली दवाइयां जैसे एस्प्रिन, एसिटेमिनोफन से भी पसीना आता है.

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