दुनिया की अनोखी सड़क, बनाने के लिए किया गया हड्डियों का इस्तेमाल

हड्डियों से बनी हुई एक अनोखी सड़क (Amazing Road) के बारे में शायद ही सुना होगा. दरअसल, रूस (Russia) में एक सड़क पूरी तरह से हड्डियों (Stone Road) से बनी हुई है.

ऑनलाइन डेस्क :

आपने पूरी दुनिया में तरह-तरह की सड़कों के बारे में सुना और पढ़ा होगा. किसी सड़क (Road) को बनाने के लिए कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया है तो किसी को बनाने के लिए सीमेंट (Cement), गिट्टी और पत्थरों  (Stones) का. लेकिन आपने हड्डियों से बनी हुई एक अनोखी सड़क (Amazing Road) के बारे में शायद ही सुना होगा. दरअसल, रूस (Russia) में एक सड़क पूरी तरह से हड्डियों (Stone Road) से बनी हुई है. 

रूस के सुदूरवर्ती पूर्वी इलाके में स्थित 2,025 किलोमीटर लंबा कोलयमा हाइवे दुनियाभर में एक बार फिर से सुर्खियों बटोर रहा है क्योंकि रूस के इरकुटस्‍क इलाके में स्थित इस रोड एक बार फिर से इंसानी हड्डियां और कंकाल मिले हैं.

स्‍थानीय सांसद निकोलय त्रूफनोव का कहना है कि सड़क पर हर जगह बालू के साथ इंसानों की हड्डियां बिखरी पड़ी हुई हैं. यह कितना भयावह नजारा है, मैं इसका वर्णन नहीं कर सकता हूं. उधर, सड़क के अंदर से इंसानी हड्डियां निकलने के बाद स्‍थानीय पुलिस भी इनकी जांच में जुट गई है. बताया जा रहा है कि ठंड के मौसम में बर्फ से जम जाने वाले इस इलाके में सड़क पर गाड़‍ियां न फिसलें, इसके लिए इंसानी हड्डियों को बालू के साथ मिलाकर उसके ऊपर डाला गया है.

बताया जा रहा है कि इस सड़क को बनाने के लिए करीब ढाई लाख से लेकर 10 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था. यह हाइवे पश्चिम में निझने बेस्‍टयाख को पूर्व में मगडान से जोड़ता है. एक समय में कोलयमा तक केवल समुद्र या विमान के द्वारा ही पहुंचा जा सकता था. लेकिन साल 1930 के दशक में सोवियत संघ में स्‍टालिन के तानशाही दौरान के दौरान इस हाइवे निर्माण शुरू हुआ. इस दौरान सेववोस्‍तलाग मजदूर शिविर के बंधुआ मजदूरों और कैदियों की मदद से साल 1932 में इसका निर्माण शुरू किया गया.  रिपोर्ट के मुताबिक इस हाइवे को बनाने में गुलग के 10 लाख कैदियों और बंधुआ मजदूरों को लगाया गया.
 
इन कैदियों में साधारण दोषी और राजनीतिक अपराध के दोषी दोनों ही तरह के कैदी शामिल थे. इनमें से कई ऐसे कैदी भी थे जो सोवियत संघ के बेहतरीन वैज्ञानिक भी थे. इनमें रॉकेट वैज्ञानिक सर्गेई कोरोलेव भी शामिल थे. उन्‍होंने साल 1961 में रूस को अंतरिक्ष में पहला इंसान भेजने में मदद की. इन्‍हीं कैदियों में महान कवि वरलम शलमोव भी शामिल थे, जिन्‍होंने कोलयमा कैंप (Kolyma Camp) में 15 साल जेल की सजा काटी.
 
उन्‍होंने इस कैंप के बारे में लिखा था, 'वहां पर कुत्‍ते और भालू थे जो इंसान से ज्‍यादा बुद्धिमानी और नैत‍िकता के साथ व्‍यवहार करते थे. उन्‍होंने अपनी किताब में लिखा था, तीन सप्‍ताह तक खतरनाक तरीके से काम, ठंड, भूख और पिटाई के बाद इंसान जानवर बन जाता था.
 
कोलयमा के पास 10 साल तक जेल की सजा काटने वाली 93 साल की एंटोनीना नोवोसाद का कहना है कि सड़क को बना रहे कैदियों को कटीले तार के दूसरी ओर गिरे बेरी के दाने इकट्ठा करने पर उन्‍हें गोली मार दी जाती थी.उसके बाद उनकी लाशों को वहीं सड़क के अंदर ही दफन कर दिया जाता था. इस इलाके में भेजे जाने वाले कैदियों के वापस लौटने का प्रतिशत केवल 20 था. जो लोग इस शिविर से भागते थे, वे केवल 2 सप्‍ताह तक ही जिंदा रह पाते थे. क्योंकि इनमें से ज्यादातर या तो वे ठंड से मर जाते थे या भालुओं का शिकार बन जाते.
 
इस इलाके में भेजे जाने वाले कैदियों के वापस लौटने का प्रतिशत केवल 20 था. जो लोग इस शिविर से भागते थे, वे केवल 2 सप्‍ताह तक ही जिंदा रह पाते थे. क्योंकि इनमें से ज्यादातर या तो वे ठंड से मर जाते थे या भालुओं का शिकार बन जाते.

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