केंद्रीय मंत्री गडकरी ने रोहतास में सोन नदी पर पण्डुका में बहुप्रतीक्षित पुल का किया शिलान्यास, लोगों में हर्ष

210 करोड़ रुपए की लागत से 1.5 किमी लंबाई के 2-लेन उच्चस्तरीय आर.सी.सी. पुल के निर्माण हो जाने से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच आवागमन सुगम हो जाएगा

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने रोहतास में सोन नदी पर पण्डुका में बहुप्रतीक्षित पुल का किया शिलान्यास, लोगों में हर्ष

पटना :

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को बिहार के रोहतास जिले के नौहट्टा के पंडुका में सोन नदी पर बनने वाले पुल का शिलान्यास किया। सोन तटीय क्षेत्रों की वर्षों पुरानी मांग सोन नदी पर पुल निर्माण का सपना शिलान्यास के बाद अब पूरा होते दिखने लगा है। सोन के तटीय क्षेत्र में पुल के शिलान्यास के बाद लोगों में खुशी की लहर है।

शिलान्यास के बाद गडकरी ने कहा कि रास्ते के विकास से ही जनता का विकास होता है। उन्होंने दावा करते हुए लोगों को भरोसाा दिया कि जो मैं बोलूंगा वह कर के दूंगा। उन्होंने बिहार में सड़क के अलावे जलमार्ग के विकास पर भी जोर दिया।


करीब 210 करोड लागत से सोन नदी पर बनने वाले इस पुल के शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने बिहार की कई योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हम 15 पुलों का निर्माण बिहार में कर रहे हैं। 9,000 करोड़ की लागत से 60 बाईपास का निर्माण हो रहा है। जल्द ही बिहार की सड़कें अमेरिका से बेहतर होंगी।

उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भरोसा देते हुए कहा कि आप योजनाएं लेकर आएं, सभी को पूरी की जायेंगी। उन्होंने इथेनॉल को ईधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए भी गडकरी ने तेजस्वी यादव से आगे आने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार में इथेनॉल के क्षेत्र में काफी काम हुए हैें। उन्होंने कहा कि अगर सभी योजनाएं सरजमी पर उतर जाएं तो किसान अन्नदाता ही नहीं उर्जादाता हो जाएंगें। उन्होंने खुद को किसान बताते हुए कहा कि मेरा जीवन किसानों को समर्पित है।

गडकरी ने इस मौके पर हालांकि झारखंड और बिहार की योजनाओं में जल्द फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं होने चिंता जाहिर की।

केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री ने कहा कि पुल के निर्माण में छेदी पासवान को विशेष रूप से धन्यवाद दूंगा। एक दिन छेदी पासवान जी आकर मेरे यहां बैठ गए और मंजूरी देने के बाद ही गए। इनके साथ-साथ बीडी राम जी को भी धन्यवाद देता हूं। इन दोनों ने इसके लिए काफी प्रयास किया दोनों को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

बिहार के रोहतास में सोन नदी पर पण्डुका के पास 210 करोड़ रुपए की लागत से 1.5 किमी लंबाई के 2-लेन उच्चस्तरीय आर.सी.सी. पुल के निर्माण हो जाने से एनएच -19 और एनएच -39 सीधे जुड़ जाएंगे, जिससे बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच आवागमन सुगम हो जाएगा। इस पुल के बनने से छतीसगढ़, उत्तर प्रदेश और झारखंड के लोगों का जाना आसान हो जाएगा।

वर्तमान में रोहतास जिले के पण्डुका और झारखंड के गढ़वा जिले से श्रीनगर पहुंचने में 150 किमी अंतर तय करना पड़ता है, इस पुल के बनने से इस सफर में चार घंटे की बचत होगी। डेहरी पुल पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा और औरंगाबाद, सासाराम शहरों को जाम की समस्या से भी छुटकारा मिलने में आसानी होगी।

बताया जाता है कि इस पुल के बनने के बाद पंडुका से झारखंड के गढ़वा जाने की दूरी 200 किलोमीटर से घटकर 63 किलोमीटर हो जाएगी।

इससे पहले केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नीतीन गडकरी, तेजस्वी यादव, छेदी पासवान व अन्य नेताओं ने शिलान्यास कार्यक्रम का शुभारंभ दीप जलाकर किया।

इस मौके पर राजद नेता और बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने नितिन गडकरी की तारीफ करते हुए कहा कि काम करने वाले का गुणगान हर जगह होता है, चाहे उसकी विचारधारा कुछ भी हो। तेजस्वी ने गडकरी की तारीफ करते हुए कहा कि इनसे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला है। उन्होंने बिहार की योजनाओं के लिए नितिन गडकरी की दरियादिली की तारीफ करते हुए कहा कि वे पार्टी नहीं, बल्कि विकास के लिए काम करते हैं। इस दौरान तेजस्वी ने बिहार को पिछड़ा राज्य बताते हुए विशेष सहायता की भी मांग की।

सोन तटीय क्षेत्रों की वर्षों पुरानी मांग सोन नदी पर पुल निर्माण का सपना शिलान्यास के बाद अब पूरा होते दिखने लगा है। सोन नदी पर पुल निर्माण का शिलान्यास से सोन तटीय गांवों के हर वर्ग में खुशी का माहौल है।

बताया जाता है कि बिहार और झारखंड के सोन तटीय इलाके में बेटी-रोटी का संबंध है। रोहतास जिले के नौहट्टा और रोहतास प्रखंड और झारखंड के गढ़वा, पलामू जिले के सोन तटीय गावो में अधिकांश लोगो के बीच व्यापार और रिश्ते हैं। पंडुका गांव के निकट पुल बन जाने पर यह संबंध और निकट हो जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस पुल के निर्माण की मांग वर्षों से की जाती रही है।

कांडी के युवा व्यवसायी मृत्युंजय चंद्रवंशी बताते हैं कि इस पुल की मांग वर्षो से की जाती रही है। इस पुल के बनने से व्यापार को गति मिलेगी। इधर, आसपास के ग्रामीणों को कहना है कि श्रीनगर-पंडुका पुल निर्माण की शिलान्यास के बाद सोन नदी पार करने के लिए जोखिम व खतरों से भरी यात्रा नाव से की जाती थी। अब पुल बन जाने के बाद लोगों को नाव की यात्रा से मुक्ति मिलेगी।