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पलामू किला मेला छठ से हो गया शुरू, लोगों को सावधानी के साथ जाने की अपील 

यह मेला पलामू के प्रख्यात आदिवासी राजा मेदिनी राय की याद में 1965 से मेला लगना प्रारंभ हुआ था 

पलामू किला मेला छठ से हो गया शुरू, लोगों को सावधानी के साथ जाने की अपील 

सुनील नूतन/सतबरवा :

छठ पारण की सुबह से लगने वाला पलामू किला का मेला छठ के दिन से ही शुरू हो गया है। मेला का आयोजन सतबरवा प्रखंड के रबदा पंचायत के फुलवरिया स्थित कलकल बहने वाली औरंगा नदी के नीचे मेला मैदान में लगता है। मेला मैदान के ठीक ऊपर पहाड़ पर बना पलामू किला है।

यह मेला पलामू के प्रख्यात आदिवासी राजा मेदिनी राय की याद में 1965 से लगना प्रारंभ हुआ था। तत्कालीन उपायुक्त कुमार सुरेश सिंह के पहल के बाद चेरो आदिवासियों को जागृत करने के उद्देश्य से मेला का शुभारंभ किया गया था।

55 वर्षों के बाद भी मेले को राजस्व मेले का दर्जा नहीं 

55 साल होने के बाद भी मेला को राजस्व मेला घोषित नहीं किया गया है। वही तत्कालीन उपायुक्त ने अट्ठारह सौ एकड़ वन क्षेत्र को अधिग्रहित कर पलामू किला के अधीन देने का प्रस्ताव आज भी अमल में नहीं लाया जा सका।

बताया जाता है कि पलामू किला का अधिकतर जमीन बेतला वन विभाग के अधीन है। वही बाकी अन्य जमीन लातेहार जिला के मनिका वन क्षेत्र में पड़ता है। बरसों से मेला के जमीन के साथ पलामू किला वन क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाले भूखंड को वन क्षेत्र से हटाकर स्वतंत्र करने की मांग राजा मेदनी राय मेला समिति की ओर से किया जाता रहा है।

पलामू किला मेला छठ से हो गया शुरू, लोगों को सावधानी के साथ जाने की अपील 

कोरोना संक्रमण में मेला सावधानी से लगाए

मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ सिंह चेरो, विनोद यादव, बीडीसी अरविंद कुमार सिंह, उमेश सिंह,विनय सिंह ,प्रदीप सिंह मुख्य संरक्षक सुदामा सिंह ,केसर परहिया ने कहा है कि कोरोना संक्रमण के चलते इस साल मेला के दौरान पहुंचने वाले लोगों से सावधानी बरतने का आग्रह किया है। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मेला का आयोजन इस वर्ष हम लोग नहीं कर रहे हैं। मेला पहुंचने वाले पर्यटक मास्क के साथ सामाजिक दूरी और एहतियात का ख्याल रखेंगे। वैसे मेला छठ के पारण के सुबह से लगता है लेकिन हर वर्ष छठ के दिन से ही दुकानदार और घूमने वाले लोग पहुंच जाते हैं।

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