महुआडांड़ में फ़ाइलेरिया उन्मूलन को लेकर प्रखंड समन्वय समिति की बैठक

को लेकर प्रखण्ड समन्वय समिति के बैठक का आयोजन किया गया

महुआडांड़ में फ़ाइलेरिया उन्मूलन को लेकर प्रखंड समन्वय समिति की बैठक

शहजाद आलम/महुआडांड़:

लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखण्ड सभागार में अनुमंडल पदाधिकारी नित निखिल सुरीन के अध्यक्षता में MDA कार्यक्रम के तहत फ़ाइलेरिया विलोपन कार्यक्रम को लेकर प्रखण्ड समन्वय समिति की बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक में मुख्य रूप से महुआडांड़ प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अमित खलखो जिला परिषद सदस्य मनीना कुजूर प्रखंड प्रमुख जॉन वाल्टर तिर्की,जेएसएलपीएस के प्रखंड समन्वयक सुजीत कुमार, स्वास्थ्य विभाग के एमटीएस अरुण भुषण गिरधा, बीपीएम सुमन किसोर एक्का, शिक्षा विभाग से नाहिद जमाल, एलएस प्रिस्का कुजूर, एग्नेसिया केरकेट्टा, राजस्व कर्मचारी दयालु केरकेट्टा, सभी पंचायत के मुखिया एवं अन्य लोग उपस्थित थे।

बैठक में उपस्थित सभी लोगों को अनुमंडल पदाधिकारी नित निखिल सुरीन के द्वारा कहा गया कि सभी लोग अपने स्तर से जागरूकता अभियान चलाकर आम जनमानस को मलेरिया रोधी दवा खिलाने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही सभी जनप्रतिनिधि अपने निकटतम केंद्र में जाकर दवा की एक खुराक खाकर कर कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।


बैठक में उपस्थित लोगों का चिकित्सा पदाधिकारी अमित खलखो एमटीएस एवं डीपीएम के द्वारा फलेरिया के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई।

डॉ अमित खलखो ने बताया कि फैलेरिया एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसके वजह से प्रभावित अंग हाथ पांव फूलना एवं हाइड्रोसिल हो सकता है। क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा भी यह फैलता है। मलेरिया का उपचार डीईसी गोली के द्वारा किया जाता है जो बहुत ही कारगर दवा है।

उन्होंने कहा कि यदि सभी व्यक्तियों को डीईसी एवं एल्बेंडाजोल गोली की एक खुराक वर्ष में एक बार खिलाई जाए तो 80 से 90% तक इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। फाइलेरिया की दवा किसी भी स्थिति में खाली पेट नहीं लेनी चाहिए। संक्रमण के शुरू में इसका कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता है कुछ सालों के बाद बुखार लगने लगता है। जब बुखार जल्दी-जल्दी दर्द के साथ आने लगता है जिसके बाद पैरों पर सूजन आने लगती है। इस बीमारी का ठीक से उपचार नहीं होने पर या सूजन स्थाई हो जाती है। सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति को कुछ सालों के बाद टांगो हाथों एवं शरीर के अन्य भागों में भी सूजन उत्पन्न होने लगती है।

उन्होंने आगे बताया कि इस प्रभावित अस्वस्थ चमड़ी पर विभिन्न प्रकार के जीवाणु तेजी से पनपने लगते हैं साथ ही प्रभावित अंगों की सलीका ग्रंथियां इनमें अधिकाधिक संख्या में पनपते जीवाणुओं को मार नहीं पाते। इसके कारण प्रभावित अंगों में दर्द लालपन एवं रोगी को बुखार आने लगता है। डीईसी एल्बेंडाजोल एक सुरक्षित दवा है। लेकिन 2 वर्ष छोटे बच्चों गंभीर रूप से बीमार एवं गर्भवती महिलाओं को एमडीए की दवा बिल्कुल नहीं खिलाना चाहिए।

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