बच्चे का पढ़ाई में मन नहीं लगे तो करे ये उपाय

वास्तुशास्त्र के मुताबिक डिजाइन किया गया अध्ययन कक्ष आपके बच्चे का एकाग्रता को मजबूत करने में काफी मदद करता है.

ऑनलाइन डेस्क :

बच्चों का पढ़ाई में अक्सर मन नहीं लगता है. वो पढ़ाई में कम और शैतानी में ज्यादा रहते हैं. इन सभी परेशानियों से हर माता-पिता परेशान रहते हैं. कई बार माता पिता समझ ही नहीं पाते हैं कि वो इस समस्या को कैसे दूर करें. इसके लिए आज हम आपको कुछ वास्तु टिप्स बताने जा रहे हैं जिन्हें आपनाकर आप इस समस्या से कई हद तक छुटकारा पा सकते हैं.

वास्तुशास्त्र के मुताबिक डिजाइन किया गया अध्ययन कक्ष आपके बच्चे का एकाग्रता को मजबूत करने में काफी मदद करता है. आपके घर में पढ़ाई करने वाले बच्चे हों या खुद के लिए अध्ययन कक्ष के रूप में किसी कमरे का उपयोग करते हैं तो उसे वास्तु के हिसाब से सजाएं. वास्तुशास्त्र के मुताबिक घर में बनाया गया स्टडी रूम छात्रों को अकादमिक रूप से अच्छा करने के लिए बहुत ज्यादा प्रोत्साहन देता है.

जो आपको अपने बच्चे के कमरे को डिजाइन करते वक्त जरूर ध्यान रखना है. सबसे महत्वपूर्ण होता है कि जिस कमरे को आप डिजाइन करवाना चाहते हो वहां पर सुबह के वक्त सूरज की रोशनी आनी बहुत जरूरी है. सूरज की हल्की किरणों से घर में पॉजिविटी आती है. कहा जाता है कि सूरज की किरणे कीटाणुओं को भी मार देती है.

कमरे में बच्चे का बेड उत्तर पूर्व दिशा में ही हमेशा रखना होना चाहिए. यह दिशा आइडियल मानी जाती है.इसके अलावा पालना खरीदते वक्त भी ध्यान दें कि उसकी लंबाई 2-3 फीट ही हो.पालने को दीवार से दूर और कमरे के ठीक दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखा जाना शुभ माना जाता है.

बच्चे के कमरे में निगेटिव एनर्जी का प्रवेश ना हो. इसके लिए वहां पर सेंधा नमक रखना चाहिए. सेंधा नमक निगेटिव एनर्जी को दूर करता है. लेकिन ध्यान रखें ये नमक वक्त के साथ-साथ बदलते रहें.कमरे का कलर करवाते वक्त हमेशा ध्यान दें कि कलर थोड़ा हल्के रंग का ही हो.

साथ ही बच्चों के खेलने वाले खिलौनों के रंग भी हल्के और वाइब्रेंट इस चुने.इसके अलावा आप बेबी का कमरा सजाने के दौरान चाहें तो पेंटिंग्स भी लगा सकती है. ये पेंटिंग्स बच्चे के कमरे में शांति, आध्यात्मिकता और प्रेरणा को दर्शाने वाली होनी चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा करने से बच्चे का मन उसी ओर विकसित होने में मदद होगी.

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