भविष्य और भाग्योदय के लिए संभाल कर रखें बच्चों के दूध वाले दांत

ज्योतिष में दांतों को विशेष महत्व दिया गया है। ज्योतिष की मानें तो दूध वाले दांतों को सुरक्षित रखना चाहिए

ऑनलाइन डेस्क :

बच्चों के जीवन में कई सारे पड़ाव आतें हैं जिनमें से बच्चों का दांत निकलना और उन्ही दूध की दांतो का वापस गिर जाना। सामान्यतः छह साल की उम्र में बच्चों की दूध की दांत गिरना शुरू हो जाते हैं और उन दांतो की जगह पर स्थायी दांत आ जाते हैं। दूध के दांतो का आना और गिरना दोनों ही ज्योतिष और स्वस्थ्य विज्ञान के नजरिये से काफी अहमियत होती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दांत गिरने के बाद उन दांतो का क्या करना चाहियें ये एक बहुत ही अहम सवाल होता हैं। इसके बारे में दिल्ली के न्यूमेरोलॉजिस्ट सिद्धार्थ एस कुमार ने जनसत्ता डॉट कॉम से खास बातचीत में विस्तार से बताया है। आइए जानते हैं इसके बारे में-


ज्योतिष में दांतो का महत्व

ज्योतिष विज्ञान की शाखा सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार व्यक्ति के शरीर के हर अंग से उसके गुण, दोष और भाग्य का निर्धारण होता है। शास्त्रों के अनुसार दांतो बनावट और उसके रंग के आधार व्यक्ति के भाग्य, सुख दुःख, ज्ञान और धन लाभ के बारें में काफी सारी जानकारी मिल सकती हैं। साफ़ सुथरे और सुन्दर दांत व्यक्ति को सौभाग्यवान बनाते हैं और व्यक्ति अपने ज्ञान ऊर्जा से औरो को भी प्रकाशित करता हैं।

बच्चों के दूध के दांत क्यों अहमियत रखते हैं ?

इसके बारें में दिल्ली के न्यूमेरोलॉजिस्ट सिद्धार्थ एस कुमार ने जनसत्ता डॉट कॉम से बताया की बच्चों के दूध के दांत काफी अहिमयत रखते हैं और उन दांतो को गिराने के बाद बहुत ही ध्यान से रखना चाहिये। मेडिकल साइंस के अनुसार दूध के दांतो में डेंटल स्टेम सेल होते हैं और उन स्टेम सेल की मदद से बच्चों की बहुत सारी बीमारियों का समाधान भविष्य में मिल सकता हैं। विज्ञान की प्रगति अनुसार दूध के दांतो का सही तरीके से रख रखाव स्टेम सेल बैंक में भी करवाना भविष्य के हिसाब से एक अच्छा निर्णय हो सकता हैं।

अब बात करते हैं इसकी महत्ता का तो ज्योतिष अनुसार सबसे पहला गिरा हुआ दांत, दूध के दांत गिरने में सबसे अहम होता हैं। सबसे पहले गिरा हुआ दांत व्यक्ति के व्यहार और मानसिक प्रस्थिति को प्रभावित करती है। पहले गिरे हुए दांत का अगर सही तरीके से रख रखाव नहीं किया जाना भविष्य में व्यक्ति को एकाकी बना देता हैं और विपरीत दशाओ में वो मानसिक परेशानियों से गुजरते है। इसके साथ ही इसका सबसे ज्यादा प्रभाव अगली पीढ़ी के लोगो पर पड़ता है।

सबसे पहले गिरे हुए दूध के दांत को सफ़ेद रुई में लपेट कर उसको बांस के पेड़ के जड़ में दबा देना चाहियें। बांस की ज्योतिष भी बहुत मान्यता हैं। शास्त्र अनुसार बांस वंश प्रगति का द्योतक होता है। बांस के पेड़ के जड़ में दबाने से व्यक्ति के जीवन में सुख शांति हैं और आने वाली पीढ़ी को भी प्रगति का संचार कराती है।

आज के शहरी भाग दौर में बांस का मिल पाना मुश्किल हो सकता हैं। व्यक्ति को फिर भी पूरी कोशिश करनी चाहियें की उन्हें बांस मिल जाए। किसी भी कारण से अगर उनको नहीं मिलता हैं तो वैसी स्थिति में सबसे पहले गिरे हुए दूध के दांत को सफ़ेद रुई में लपेट कर मिटटी में दबा देना चाहियें। बाकी गिरे हुए दांतो को आप स्टेम सेल बैंक में रख सकते हैं नहीं तो उसको भी ऊपर बताए गए तरीके से मिटटी में दबा सकते हैं।

देश की अन्य खबरें