पीपल के पेड़ पर किसका होता है वास, देवी-देवता या भूत

पूजा-पाठ के कामों में तुलसी का प्रयोग श्रेष्ठ माना जाता है, वैसे ही व्रत विधान में पीपल, नीम और बरगद के पेड़ को भी विशेष जगह दी गई है.

ऑनलाइन डेस्क :

आपने बचपन से लेकर अब तक सुना होगा कि पीपल के पेड़ पर भूत प्रेत रहते हैं. जो किसी को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसीलिए ज्यादातर लोग रात के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे जाने से बचते हैं. बता दें कि पीपल के पेड पर भूतों प्रेतों का नहीं बल्कि देवताओं का वास होता है.

ऐसा कहा जाता है कि पीपल के वृक्ष पर भूत रहता है लेकिन उसको देखा किसने है. यही नहीं बहुत से लोग पीपल के नीचे दीपक जलाते हैं. तो कुछ लोग मानते हैं कि वह भूतों को खुश करने के लिए ऐसा करते हैं. ऐसे बहुत से सवाल हैं जो हर किसी के मन में जरूर उठते हैं. आज हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं.

वैदिक मान्यताओं के मुताबिक, कुछ खास पेड़-पौधों को धर्म-कर्म में विशेष महत्व दिया जाता है. जैसे कि पूजा-पाठ के कामों में तुलसी का प्रयोग श्रेष्ठ माना जाता है, वैसे ही व्रत विधान में पीपल, नीम और बरगद के पेड़ को भी विशेष जगह दी गई है. ऐसा माना जाता है कि पीपल के पेड़ में देवता वास करते हैं. स्कन्दपुराण में कहा गया है कि पीपल के पेड़ में भगवान विष्ण का वास है. पीपल के वृक्ष को अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है जिसके पत्ते कभी समाप्त नहीं होते.

ज्योतिषशास्त्र के मुताबिक, भी पीपल के पेड़ बहुत ही शुभ फल देने वाला होता है. शनि से संबंधित समस्यायों के लिए पीपल वृक्ष लगाने शुभ माना जाता है. पीपल में रात को एक खास क्रिया करने का गुण होता है जिसके चलते पीपल रात को भी ऑक्सीजन देता है जबकि बाकी के पेड़ ऐसा नहीं करते. इस पेड़ की जड़ में जितना पानी दिया जाता है वो उतना ही ऑक्सीजन देता है. इसीलिए पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना शुभ माना जाता है. ये प्रकृति के लिए भी अच्छा है. ऐसा माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में पानी देने से व्यक्ति जन्म-जन्म के पापों से मुक्त हो जाता है.
 
इसके अलावा पीपल के पेड़ को कभी काटना नहीं चाहिए ऐसा करने से पितृदोष लगता है. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाकर रखने के बाद वापस पीछे नहीं देखा जाता है. बता दें कि पीपल का पेड़ बहुत ही शुभ माना जाता है. भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय वृक्ष है पीपल. गीता में श्रीकृष्ण स्वयं कहते हैं कि वृक्षों में मैं पीपल हूं. शास्त्रों में इसे एक दैवीय पौधा बताया गया है. वेदों में भी पीपल के पेड़ को पूजनीय बताया गया है. ऐसा कहा जाता है कि इसके मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास है. स्कंद पुराण में कहा गया है कि पीपल के मूल में विष्णु, तनों में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत भगवान निवास करते हैं.

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